छोटा जवाब: फ़ारसी (Farsi) और अरबी दो अलग भाषाएँ हैं, जो दो अलग भाषा-परिवारों से आती हैं। ये देखने में एक जैसी लगती हैं, क्योंकि फ़ारसी अरबी लिपि में लिखी जाती है, और इनमें हज़ारों शब्द साझा हैं, क्योंकि फ़ारसी ने सदियों तक अरबी से बहुत शब्द लिए। लेकिन व्याकरण बिल्कुल अलग है: फ़ारसी एक भारोपीय (इंडो-यूरोपीय) भाषा है, यानी हिन्दी की दूर की रिश्तेदार। इसमें व्याकरणिक लिंग नहीं है, अंग्रेज़ी के "the" जैसा कोई शब्द नहीं है, और क्रिया वाक्य के अंत में आती है। अरबी एक सामी (सेमिटिक) भाषा है, जो तीन व्यंजनों वाली धातुओं (roots) पर बनी है। फ़ारसी बोलने वाला बहुत से अरबी शब्द पहचान लेता है, पर अरबी सीखे बिना अरबी बातचीत नहीं समझ पाता।
हिन्दी बोलने वालों के लिए यह विषय ख़ास तौर पर दिलचस्प है: किताब, वक़्त, ख़बर, हाल और फ़िक्र जैसे शब्द आप रोज़ बोलते हैं। ये अरबी शब्द हैं जो फ़ारसी के रास्ते उत्तर भारत की भाषाओं तक पहुँचे।
फ़ारसी और अरबी: एक नज़र में
"फ़ारसी" बस फ़ारसी भाषा का अपना नाम है (فارسی, fārsi)। Britannica के अनुसार फ़ारसी हिन्द-ईरानी परिवार की ईरानी शाखा की भाषा है। यह ईरान की आधिकारिक भाषा है; इसके रूप दरी और ताजिक अफ़ग़ानिस्तान और ताजिकिस्तान में आधिकारिक हैं (ताजिक सिरिलिक लिपि में लिखी जाती है)।
| अरबी | फ़ारसी | |
|---|---|---|
| भाषा-परिवार | सामी (अफ़्रो-एशियाई) | भारोपीय (ईरानी) |
| सबसे क़रीबी रिश्तेदार | हिब्रू, अरामी, माल्टीज़ | कुर्दी, पश्तो, और थोड़ा दूर हिन्दी, अंग्रेज़ी |
| लिपि | अरबी, 28 अक्षर | अरबी पर आधारित, 32 अक्षर |
| व्याकरणिक लिंग | हाँ: पुल्लिंग और स्त्रीलिंग | नहीं |
| "the" जैसा शब्द | हाँ: الـ al- | नहीं |
| आम शब्द-क्रम | क्रिया–कर्ता–कर्म या कर्ता–क्रिया–कर्म | कर्ता–कर्म–क्रिया (हिन्दी की तरह) |
| शब्द कैसे बनते हैं | धातु और साँचे (k-t-b → किताब, लेखक, दफ़्तर) | मूल रूप, उपसर्ग, प्रत्यय और संयुक्त क्रियाएँ |
| द्विवचन ("दो चीज़ें" का अलग रूप) | हाँ | नहीं |
| लिखित और बोली जाने वाली भाषा का फ़र्क़ | बड़ा: आधुनिक मानक अरबी और कई बोलियाँ | कम: लिखित और बोली जाने वाली फ़ारसी पास-पास हैं |
ये इतनी एक जैसी क्यों दिखती हैं
सातवीं सदी में इस्लाम के ईरान पहुँचने के बाद, वहाँ अरबी धर्म और ज्ञान की भाषा बन गई। अगली सदियों में जब फ़ारसी फिर से लिखी जाने लगी, तो उसने अरबी अक्षर अपनाए और उन आवाज़ों के लिए चार नए अक्षर जोड़े जो अरबी में नहीं हैं: پ प, چ च, ژ झ़ (अंग्रेज़ी measure वाली आवाज़) और گ ग। हमारी गाइड अरबी, फ़ारसी और उर्दू के अक्षर एक जैसे क्यों दिखते हैं में हर अलग अक्षर और रूप दिया गया है।
लिपि के साथ शब्द भी आए। Encyclopaedia Iranica उन अनुमानों का हवाला देती है जिनके अनुसार दसवीं सदी में लिखित फ़ारसी शब्दावली का लगभग 30% और बारहवीं सदी में लगभग 50% हिस्सा अरबी शब्दों का था: धर्म, ज्ञान, प्रशासन और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में। इसलिए किसी फ़ारसी अख़बार में कई शब्द अरबी होते हैं, पर उन्हें जोड़ने वाले वाक्य पूरी तरह फ़ारसी होते हैं।
व्याकरण: जहाँ दोनों के रास्ते अलग होते हैं
1. फ़ारसी में लिंग नहीं है
अरबी लगभग हर चीज़ को पुल्लिंग और स्त्रीलिंग में बाँटती है: सर्वनाम, क्रिया और विशेषण। फ़ारसी में "वह" (पुरुष) और "वह" (स्त्री) के लिए एक ही शब्द है, और क्रिया लिंग से कभी नहीं बदलती। हिन्दी से भी यह आसान है: हिन्दी में "लिखता/लिखती" बदलता है, फ़ारसी में नहीं।
| हिन्दी | अरबी | फ़ारसी |
|---|---|---|
| वह (पुरुष) / वह (स्त्री) | هو huwa / هي hiya | او u (दोनों) |
| उसने लिखा (पुरुष) / उसने लिखा (स्त्री) | كتبَ kataba / كتبتْ katabat | او نوشت u nevesht (दोनों) |
| बड़ा घर / बड़ी गाड़ी | بيت كبير bayt kabīr / سيارة كبيرة sayyāra kabīra | خانه بزرگ khāne-ye bozorg / ماشین بزرگ māshin-e bozorg |
अरबी में स्त्रीलिंग संज्ञा के साथ विशेषण kabīr बदलकर kabīra हो जाता है। फ़ारसी में bozorg कभी नहीं बदलता।
2. क्रिया अंत में आती है
फ़ारसी हिन्दी की तरह क्रिया को वाक्य के अंत में रखती है। अरबी आम तौर पर उसे पहले या दूसरे स्थान पर रखती है।
- अरबी: قرأ عليّ الكتاب qaraʾa ʿAlī al-kitāb, शब्दशः "पढ़ी अली ने किताब"।
- फ़ारसी: علی کتاب را خواند ʿAli ketāb rā khānd, शब्दशः "अली किताब (rā) पढ़ी", यानी हिन्दी जैसा ही क्रम।
छोटा-सा शब्द را rā निश्चित कर्म को चिह्नित करता है, कुछ-कुछ हिन्दी के "को" की तरह। अरबी में ऐसा कोई शब्द नहीं है।
3. "the" नहीं, पर "एक" है
अरबी निश्चित संज्ञा पर الـ al- लगाती है: كتاب kitāb "एक किताब", الكتاب al-kitāb "वह किताब (the book)"। फ़ारसी में "the" के लिए कोई शब्द नहीं है। इसके बजाय वह अनिश्चित संज्ञा को -i या یک yek ("एक") से चिह्नित कर सकती है: کتابی ketābi या یک کتاب yek ketāb, "एक किताब"।
4. इज़ाफ़त का जोड़
संज्ञा को विशेषण या दूसरी संज्ञा से जोड़ने के लिए फ़ारसी बीच में एक छोटी स्वर-ध्वनि -e जोड़ती है, जिसे इज़ाफ़त (ezafe) कहते हैं। यह आम तौर पर लिखी नहीं जाती। आपने इसे "शेर-ए-पंजाब" या "आब-ए-हयात" जैसे नामों में सुना होगा। अरबी यही काम शब्द-क्रम और अपने नियमों से करती है (iḍāfa रचना)।
| हिन्दी | अरबी | फ़ारसी |
|---|---|---|
| छात्र की किताब | كتاب الطالب kitāb aṭ-ṭālib | کتاب دانشجو ketāb-e dāneshju |
| बड़ी किताब | الكتاب الكبير al-kitāb al-kabīr | کتاب بزرگ ketāb-e bozorg |
अरबी विशेषण पर भी al- दोहराती है; फ़ारसी बस -e जोड़ती है।
5. बहुवचन: साँचे बनाम एक प्रत्यय
अरबी में "टूटे बहुवचन" (broken plurals) होते हैं, जिनमें शब्द का भीतरी रूप बदल जाता है: كتاب kitāb → كتب kutub (किताबें), ولد walad → أولاد awlād (लड़के, बच्चे)। फ़ारसी आम तौर पर -hā जोड़ती है: کتابها ketābhā (किताबें)। Iranica के अनुसार अरबी टूटे बहुवचन फ़ारसी में भी मिलते हैं, पर ज़्यादातर लिखित भाषा में। अरबी में द्विवचन भी है (كتابان kitābān, "दो किताबें"); फ़ारसी बस دو کتاب do ketāb कहती है, जैसे हिन्दी में "दो किताबें"।
6. क्रियाएँ: धातु बनाम मूल रूप
अरबी क्रिया एक धातु से बनती है। k-t-b से बनते हैं كتبتُ katabtu (मैंने लिखा), أكتب aktubu (मैं लिखता हूँ), كاتب kātib (लेखक, हिन्दी "कातिब") और مكتب maktab (दफ़्तर, मेज़)। Britannica बताती है कि फ़ारसी इसके बजाय उपसर्ग, प्रत्यय और सहायक क्रियाओं का इस्तेमाल करती है। हर फ़ारसी क्रिया का एक भूतकाल-मूल और एक वर्तमान-मूल होता है:
| अरबी | फ़ारसी | |
|---|---|---|
| लिखना | (धातु k-t-b) | نوشتن neveshtan |
| मैंने लिखा | كتبتُ katabtu | نوشتم neveshtam |
| मैं लिखता हूँ / लिख रहा हूँ | أكتب aktubu | مینویسم minevisam |
फ़ारसी बहुत-सी क्रियाएँ एक संज्ञा और کردن kardan ("करना") जैसी सहायक क्रिया से बनाती है, और वह संज्ञा अक्सर अरबी होती है: فکر کردن fekr kardan (सोचना, अरबी فكر fikr "विचार" से)। यह हिन्दी के "फ़िक्र करना" जैसा ही है! अरबी शब्द उधार लिया गया है; उसके आसपास का व्याकरण फ़ारसी ही रहता है।
7. सर्वनाम
| हिन्दी | अरबी | फ़ारसी |
|---|---|---|
| मैं | أنا anā | من man |
| तू / तुम | أنتَ anta / أنتِ anti | تو to |
| वह | هو huwa / هي hiya | او u |
| हम | نحن naḥnu | ما mā |
शब्दावली: क्या साझा है और क्या नहीं
अरबी शब्द जो फ़ारसी में (और अक्सर हिन्दी में भी) मिलेंगे
| हिन्दी | अरबी | फ़ारसी |
|---|---|---|
| किताब | كتاب kitāb | کتاب ketāb |
| वक़्त | وقت waqt | وقت vaqt |
| ख़बर | خبر khabar | خبر khabar |
| हाल | حال ḥāl | حال hāl |
| घंटा, घड़ी | ساعة sāʿa | ساعت sāʿat |
| स्कूल (मदरसा) | مدرسة madrasa | مدرسه madrese |
अर्थ पर ध्यान दें: अरबी صحبة ṣuḥba का मतलब है "साथ, संगत", जबकि फ़ारसी صحبت sohbat का मतलब है "बातचीत", और صحبت کردن sohbat kardan रोज़ की क्रिया "बात करना" है।
रोज़मर्रा के शब्द जो बिल्कुल अलग हैं
फ़ारसी के सबसे बुनियादी शब्द उसके अपने हैं, और कई के भारोपीय रिश्तेदार हिन्दी में मिलते हैं:
| हिन्दी | अरबी | फ़ारसी |
|---|---|---|
| माँ (माता) | أم umm | مادر mādar |
| पिता | أب ab | پدر pedar |
| पानी | ماء māʾ | آب āb |
| रोटी | خبز khubz | نان nān |
| अच्छा | جيد jayyid | خوب khub |
| हाँ | نعم naʿam | بله bale |
mādar और माता, pedar और पिता की तुलना कीजिए। गिनती में परिवारों का फ़र्क़ साफ़ दिखता है: फ़ारसी یک، دو، سه، چهار، پنج yek, do, se, chahār, panj हिन्दी के एक, दो, तीन, चार, पाँच के बहुत क़रीब है, जबकि अरबी واحد، اثنان، ثلاثة، أربعة، خمسة wāḥid, ithnān, thalātha, arbaʿa, khamsa बिल्कुल अलग परिवार से आती है।
आवाज़ें: फ़ारसी गले पर कम ज़ोर देती है
Iranica बताती है कि फ़ारसी में अरबी आवाज़ों का क्या होता है: "भारी" (emphatic) व्यंजन और th/dh आवाज़ें सादी आवाज़ों में मिल जाती हैं, इसलिए ث س ص तीनों स बोले जाते हैं, और ذ ز ض ظ चारों ज़। ح साधारण ह बन जाता है, ع आवाज़ में बस हल्की-सी रुकावट रह जाता है, और ق को غ की तरह बोला जाता है। अरबी w आम तौर पर v बन जाता है, इसीलिए waqt फ़ारसी में vaqt है। हिन्दी-उर्दू में भी यही सादगी दिखती है।
बदले में फ़ारसी में ऐसी आवाज़ें हैं जो अरबी में नहीं हैं: प, च, झ़ और ग, और छह स्वर (a, e, o, ā, i, u), जबकि अरबी में तीन छोटे और तीन लंबे स्वर हैं। अरबी सीखने वाले फ़ारसी और हिन्दी बोलने वालों के लिए गले की आवाज़ें और भारी व्यंजन ही असली मेहनत हैं; हमारा लेख अरबी की कुछ आवाज़ें कठिन क्यों हैं (अंग्रेज़ी में) समझाता है कि मुँह जानी-पहचानी आवाज़ों पर क्यों लौट जाता है।
दोनों भाषाओं में वही वाक्य
| हिन्दी | अरबी | फ़ारसी |
|---|---|---|
| नमस्ते (सलाम) | السلام عليكم as-salāmu ʿalaykum | سلام salām |
| आप कैसे हैं? | كيف حالك؟ kayfa ḥāluk? | حال شما چطور است؟ hāl-e shomā chetor ast? |
| मेरा नाम सारा है। | اسمي سارة. ismī Sāra. | اسم من سارا است. esm-e man Sārā ast. |
| मैं (विश्वविद्यालय का) छात्र हूँ। | أنا طالب. anā ṭālib. | من دانشجو هستم. man dāneshju hastam. |
| शुक्रिया। | شكراً shukran | متشکرم motashakkeram / ممنون mamnun / مرسی mersi |
साझा क्या है: salām, ḥāl और ism अरबी शब्द हैं जो फ़ारसी में बसे हैं, और "शुक्रिया" कहने के तीन फ़ारसी तरीक़ों में से दो अरबी शब्दों पर बने हैं (तीसरा, mersi, फ़्रांसीसी से आया है)। "मम्नून" हिन्दी-उर्दू में भी सुनाई देता है। लेकिन अरबी को anā ṭālib में "हूँ" की ज़रूरत नहीं, जबकि फ़ारसी वाक्य هستم hastam ("हूँ") पर ख़त्म होता है, बिल्कुल हिन्दी की तरह।
क्या फ़ारसी बोलने वाले अरबी समझ लेते हैं?
असल में नहीं। अरबी पढ़ने वाला फ़ारसी भाषी लगभग हर शब्द उच्चारित कर सकता है, कई संज्ञाएँ और विशेषण पहचान लेगा और अक्सर किसी औपचारिक लेख का विषय भाँप लेगा। लेकिन अरबी क्रियाएँ, सर्वनाम, छोटे व्याकरणिक शब्द और ज़्यादातर रोज़मर्रा की शब्दावली नई हैं, इसलिए पूरे वाक्य समझ से बाहर रहते हैं। बोली जाने वाली अरबी बोलियाँ और भी मुश्किल हैं। उलटा भी सच है: अरबी भाषी को फ़ारसी में जाने-पहचाने शब्द सुनाई देते हैं, पर ऐसी भाषा नहीं जिसे वह समझ सके।
चुनाव से पहले एक और फ़र्क़: फ़ारसी में लिखी जाने वाली भाषा बोली जाने वाली भाषा के क़रीब है; औपचारिक miravam ("मैं जाता हूँ") बोलचाल में miram बन जाता है। अरबी सीखने वाले को आधुनिक मानक अरबी और किसी बोली के बीच चुनना होता है; हमारी गाइड पहले कौन-सी अरबी सीखें इसमें मदद करती है।
कौन-सी सीखना आसान है?
हिन्दी बोलने वालों के लिए फ़ारसी का व्याकरण आम तौर पर हल्का है: लिंग नहीं, नियमित बहुवचन, क्रिया के प्रत्यय जो लगभग नहीं बदलते (हालाँकि हर क्रिया के दो मूल रूप याद करने पड़ते हैं), और हिन्दी जैसा शब्द-क्रम। अरबी ज़्यादा माँगती है: धातु और साँचे, टूटे बहुवचन, लिंग का मेल और गले की आवाज़ें। हमारी ईमानदार गाइड क्या अरबी सीखना मुश्किल है बताती है कि किन हिस्सों में समय लगता है।
अगर आप उर्दू लिपि पढ़ते हैं या फ़ारसी जानते हैं, तो अरबी में आपकी शुरुआत पहले से आगे है: आप लिपि पढ़ते हैं और बहुत-से अरबी शब्द जानते हैं। आपको चाहिए अरबी की आवाज़ें, व्याकरण और वे रोज़मर्रा के शब्द जो फ़ारसी ने कभी उधार नहीं लिए। हमारा पूरा अरबी वीडियो कोर्स ठीक यहीं से शुरू होता है: हर अक्षर अरबी आवाज़ के रूप में, और आपके पहले वाक्य क़दम-दर-क़दम। आप हमारे मुफ़्त अरबी ऑडियो पाठों से अपने कान को भी अभ्यास करा सकते हैं।